• Bajra Plants are leafy with profuse tillering and have 9-10% protein at boot stage.
  • Bajra is good for hay and silage making. It is moderately resistant to downy mildew and ergot diseases. The green fodder yield is 50–75 t/ha.
  • Bajra is ready for fodder harvest in 50–55 days and produces green fodder to the tune of 30 t/ha.

 

 

 

Fodder Bajra – Jungee

बढ़ती आबादी के बीच इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिये खान-पान की आपूर्ति करना चिंता का विषय बनता जा रहा है. सालभर पशु चारे (Animal Feed)की आपूर्ति करने के बाद दिसंबर माह तक देश में हरे चारे (Green Fodder) की कमी हो जाती है, जिसके चलते पशुओं की सेहत (Dairy Animal’s Health) के साथ-साथ दूध उत्पादन (Milk Production) पर भी बुरा असर पड़ता है. वैसे तो हरे चारे की कमी होने पर पशुओं को गेहूं, चना और मसूर का सूखा भूसा खिला देते हैं, लेकिन इससे दूध की क्वालिटी (Quality of Milk) पर गिर जाती है.

इस समस्या को दूर करने के लिये 5 हरे चारे की किस्मों को उगाने की सलाह दी जाती है. खासकर जब दिसंबर में हरे चारे की कमी (Lack of Green Fodder) हो जाती है. ऐसी स्थति में अगस्त माह में नेपियर घास, गिनी घास, त्रिसंकर घास, पैरा घास और स्टाइलो की खेती करनी चाहिये, जिससे समय पर पशुओं के लिये हरे चारे के भंडार खुल जायें और कोई भी पशु पोषण से वंचित ना रहे.

नेपियर घास
नेपियर घास को हाथी घास भी कहते हैं, जिसे साल में कई बार उगाया जा सकता है. इसकी खेती के लिए मिट्टी में जड़ों की रोपाई की जाती है, जिसके बाद हल्की सिंचाई का काम किया जाता है. इसकी खेती जुलाई से लेकर अगस्त के महीने में की जाती है, जिसके बाद 70 से 75 दिनों के अंदर इसकी पहली फसल कटाई के लिये तैयार हो जाती है.

इसके बाद हर 35 से 40 दिनों में दोबारा इसकी कटाई करके हरा चारा ले सकते हैं. इसके बेहतर उत्पादन के लिये यूकिआ या जीवामृ का छिड़काव करना चाहिए. सालभर में नेपियर घास की कम से कम इसकी आठ बार कटाई करके 800 से 1000 क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं.

गिनी घास
छायादार इलाकों के लिए गिनी खास किसी वरदान से कम नहीं है. फलों के बागों में इसकी खेती करना बड़ा आसान होता है. इसकी खेती के लिए सिंचित दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है. खेत में इसकी जड़ों की रोपाई की जाती है, जिसके लिये नर्सरी तैयार की जाती है. इसकी खेती जुलाई से अगस्त महीने में करने पर दिसंबर तक हरे चारे की आपूर्ति सुनिश्चित होती रहती है.

त्रिसंकर घास
नेपियर घास की तुलना में त्रिसंकर घास की बढ़वार तेजी से होती है. कम जगह में भी मेड़ों पर क्यारियों में इसकी खेती कर सकते हैं. इसका उत्पादन और इसकी ऊंचाई नेपियर घास की तुलना में कहीं ज्यादा होती है. नेपियर की तरह ये हरी घास भी यह भी पशुओं के लिए एक बेहतरीन पोषक आहार के रूप में काम करती है.

पैरा घास
दलदली और अधिक नमी वाली जमीनों का सही इस्तेमाल करने के लिये पैरा घास की खेती कर सकते हैं. इसकी खेती ज्यादातर सिंचित और अधिक बारिश वाले इलाकों में की जाती है. धान की तरह दो से तीन फीट पानी होने पर ये घास तेजी से बढ़ती है और बंपर उत्पादन देती है. पैरा घास की रोपाई के 70 से 80 दिनों के बाद ही ये कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद यह हर 35 से 40 दिन में इससे हरे चारे की उपज ले सकते हैं.

स्टाइलो घास
स्टाइलो घास की खेती (Stylosanthes Grass)दलहनी फसल के रूप में की जाती है. इसकी सीधी बिजाई या फिर नर्सरी (Green Feed Nursery) लगाकर भी खेती और काम कर सकते हैं. इसकी खेती भी में ही ज्वार बाजरा और मक्का की फसल के साथ खरीफ सीजन में ही (Green Fodder in Kharif Season) की जाती है. बेहद कम समय में यह 0.8 से 1.6 मीटर तक बढ़ जाती है.